Shree Jai Ram Ashram

Shree Jai Ram Ashram

Facilities in the Ashram Shree Jai Ram Ashram
Year of Establishment

Shri Jairam Ashram

Address Bhimgoda, Haridwar, Uttarakhand 249401

Phone No.  01334 261 735

ब्रह्मलीन श्री जयराम जी महाराज का परिचय

महाराज जयराम जी का मूल स्थान ग्राम छोछी जिला सोनीपत हरियाणा में था। वह पंचाग्नि तपस्या करते। हरियाणा के विभिन्न गॉवों में ज्येश्ठ मास में दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक अपने चारों ओर 5 फूट की दूरी पर अग्नि प्रज्जवलित करवाते और उसके मध्य में बैठते। ऊपर भगवान भास्कर की प्रचण्ड किरणें, इस स्थिति में बैठकर एक आसन में 3 घटें तक गायत्री जाप करते।

वर्षा ऋतु में वर्षा के समय विल्व वृक्ष अथवा पीपल के पेड़ के नीचे एक पैर से खड़े होकर तथा दोनों हाथ ऊपर करके तीन घंटे गायत्री जाप करते।

वे गॉवों में घूम-घूम कर सदाचार धर्माचरण की शिक्षा देते दान एवं दया करने की प्रेरणा देते एवं समाज में प्रचलित अंधविश्वास एवं कुरूतियों को दूर करने के लिए प्रोत्साहित करते। महाराज जी के प्रभाव से बहुत से लोगों ने शराब आदि व्यसनों का त्याग किया।

वे गौ-सेवा पर बहुत बल देते और गौ-संवर्धन हेतु ग्रामवासियों को प्रोत्साहित करते। उनकी प्रेरणा से अमावस को हल चलाकर बैलों को विश्राम देने की प्रथा का शुभारम्भ हुआ जो आज भी हरियाणा पंजाव के गॉवों में प्रचलित है। उस समय बूढ़ी एवं अपाहिज गायों को बध हेतु बेच दिया जाता था। इससे दु:खी होकर महाराज जी ने गौ-सेवा हेतु बेरीजिला रोहतक हरियाणा में गौशाला की स्थापना की जिसकी एक शाखा ग्राम जाखौली जिला सोनीपत में हैं। श्री जयराम पंचायती गौशाला बेरी एवं जाखौलीमें 1000 से अधिक बूढ़ी अपाहिज गायों की सेवा की जाती है।

महाराज श्री जयराम जी घूमते-घामते तपस्या एवं साधना हेतु ऋषिकेश में सन्‌ 1885 में आये और पोष मास में मायाकुण्डमें गंगा के अन्दर तीनघंटे ब्रह्ममूहुर्त में खड़े होकर गायत्री मा जापकरते। उन्होंने 12 वर्ष में एक करोड़ गायत्री मंत्र का जाप किया।


आश्रम का परिचय

अति पवित्र स्थली हरिद्वार में गंगा घाट के किनारे ब्रह्मचारी श्री देवेन्द्र स्वरूप जी महाराज ने भीमगोड़ा में, सन् 1972 में भूमि खरीदी। आदिगुरू ब्रह्मचारी श्री जयराम जी महाराज की पुण्य-स्मृति में इस भूमि पर एक विशाल भवन के निर्माण का कार्य सन् 1974 में आरम्भ किया गया। बारह वर्ष के अथक परिश्रम के परिणामस्वरूप 1986 में यह भवन बनकर तैयार हुआ जनसेवा तथा आधुनिक सुख-सुविधा से युक्त इस आश्रम ने अल्पकाल में ही आशातीत प्रसिद्धि प्राप्त कर ली।

परम पूज्य ब्रह्मचारी श्री देवेन्द्र स्वरूप जी महाराज ने जन कल्याण हेतु इस भवन के साथ-साथ धर्मार्थ चिकित्सालय, अन्न भंडार तथा पुस्तकालय आदि भी स्थापित किये है।

श्री जयराम ट्रस्ट

श्री जयराम अन्नक्षेत्र की स्थापना परमपूज्य तपस्वी, वीतरागी,सिद्धपुरूष 108 ब्रहमचारी श्री जयराम जी महाराज द्वारा 1889 में दण्डीस्वामियों, ब्रहमचारियों तथा यात्रियों की सेवा हेतु की गयी थी। पतित पावनी भागीरथी के तट पर ऋषिकेश में स्थित यह अन्नक्षेत्र गंगा की भाति अजस्त्र बहती धारा के समान जनमानस की अविरल सेवा करते हुए अपने 107 में वर्ष में प्रवेश कर रहा है।

प्रम श्रद्धेय ब्रहमचारी श्री जयराम जी महाराज का जन्म वर्तमान हरियाणा प्रान्त के जिला रोहतक, गांव छोछी में

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